अल-फ़लाह (AL-Falah) यूनिवर्सिटी का निकला ‘कांग्रेस’ से कनेक्शन? जाँच में चौंकाने वाले ख़ुलासे

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20/11/25 Delhi Redfort Blast:- दिल्ली के लाल किला परिसर के पास धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे अल फलाह ग्रुप की काली परतें भी तेज़ी से उधड़ रही हैं। 2007 से 2014 के दौरान हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस पर आरोप है की हुड्डा सरकार ने स्पेशल एक्ट पास करके ना सिर्फ़ ‘अल-फ़लाह‘ यूनिवर्सिटी की मदत की बल्कि सिर्फ वोट की राजनीति के लिए कांग्रेस सरकार ने दुश्मनों को पनपने दिया। यही नहीं कांग्रेस सरकार ने अल-फ़लाह‘ यूनिवर्सिटी के लिए ज़मीन अनुदान से लेकर कई अन्य सुविधाओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए थे। तथा प्राइवेट यूनिवर्सिटी का दर्जा देने के लिए कांग्रेस ने कानून पास किये थे।

आरोप है की कांग्रेस को इस यूनिवर्सिटी के सारे मंसूबों का पता था। 2008 के जयपुर ,अहमदाबाद धमाकों में आतंकी लिंक सामने आने के बाद भी अल -फ़लाह यूनिवर्सिटी पर न ही तो कारवाही की गई और न ही जाँच की गई।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी का एक और आतंकी लिंक आया सामने
अल फ़लाह यूनिवर्सिटी का आतंकियों से पुराना कनेक्शन सामने आया है जहाँ 2007-2008 आतंकी हमले का गुनहगार भी इसी यूनिवर्सिटी का छात्र था। आतंकी शादाब बेग 2007 में इसी अल फ़लाह इंजीनियरिंग कॉलेज का छात्र था।

आतंकी शादाब बेग जयपुर ,अहमदाबाद समेत 4 धमाकों का मास्टर माइंड था। जिसके बाद भी वह आतंकी सकुशल भारत से फरार हो गया जिसके प्रत्यापण के लिए भी उस समय की तत्तकालीन कांग्रेस सरकार ने कोई रूचि नहीं दिखाई।

अल- फलाह ग्रुप का चेयरमैन गिरफ़्तार

इसी बीच ईडी ने ताबड़तोड़ एक्शन दिखाते हुए मनी लॉन्ड्रिंग केस में अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को दबोच लिया है।
गिरफ्तारी PMLA की धारा 19 के तहत हुई, यानी एजेंसी के पास उसके खिलाफ ठोस और सीधे सबूत हाथ लगे हैं। सूत्रों का दावा है कि अल फलाह ग्रुप पर चल रही लगातार छापेमारी में जो दस्तावेज और डिवाइस मिले, उन्होंने जवाद की भूमिका को बेहद संदिग्ध और गंभीर बना दिया।

मात्र कहने के लिए है ट्रस्ट असल में इरादे थे ख़तरनाक
यूजीसी ने भी अल फलाह यूनिवर्सिटी की परतें उधेड़ते हुए साफ कहा था—संस्थान महज सेक्शन 2(f) के दायरे में आता है और 12(B) के लिए उसने कभी अप्लाई भी नहीं किया।
जांच में खुलासा हुआ कि 1995 से चल रहा अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट दरअसल “चैरिटी” से ज्यादा जवाद सिद्दीकी का निजी साम्राज्य था। फंडिंग, फैसले, संचालन—हर धागा जवाद की मुट्ठी में था। ट्रस्ट के तहत चल रहे सभी संस्थानों का आर्थिक नियंत्रण उसी के इशारों पर चलता रहा।

शेल कंपनियों का मायाजाल
दिल्ली ब्लास्ट के बाद ईडी ने मंगलवार को बिना चेतावनी के दमदार दबिश दी और दिल्ली में 19 लोकेशनों पर साथ-साथ रेड मारी। इस कार्रवाई में 48 लाख रुपये कैश, भारी मात्रा में डिजिटल डिवाइस, संदिग्ध दस्तावेज और शेल कंपनियों का पूरा नेटवर्क पकड़ा गया। सूत्र कहते हैं कि अल फलाह ग्रुप की तेज़ रफ्तार तरक्की के पीछे वित्तीय अनियमितताओं का मोटा खेल छिपा था—और अब ईडी की इस कार्रवाई के बाद पूरी कहानी सामने आने की कगार पर है।

आतंकियों की इंदौर में फरारी
आतंकियों ने शांत शहर इंदौर को शरण स्थली के रूप में भी माना है। प्रमुख आतंकी हमलों का आरोपित अब्दुल सुभान कुरैशी,कयामुद्दीन कपाड़िया और बब्बर खालसा का आतंकी आकाशदीप जैसे खतरनाक आतंकी शहर में फरारी काट चुके हैं।

इन आतंकी घटनाओं का रहा है संबंध
18 फरवरी 2007 में समझौता एक्सप्रेस में बम ब्लास्ट करने की इंदौर में साजिश हुई। इंदौर में ही बम बनाए और ट्रेन में रखे गए।
8 सितंबर 2006 में मालेगांव(महाराष्ट्र) में धमाका किया गया। इसके मास्टरमाइंड इंदौर में भी थे। बम और बाइक की व्यवस्था की गई।
26 जुलाई 2008 में अहमदाबाद(गुजरात) में सीरियल बम धमाके हुए। मास्टरमाइंड सफदर नागौरी ने साजिश की।
देशभर में सिमी आतंकियों का माड्यूल तैयार करने वाले सफदर नागौरी ने चौरल में ट्रेनिंग कैंप आयोजित कर लड़ाके तैयार किए।
नेपाल से गिरफ्तार अब्दुल सुभान कुरैशी ने आजाद नगर और खजराना में फरारी काटी।
24 जुलाई 2025 को दिल्ली की स्पेशल सेल ने बब्बर खालसा के आतंकी आकाशदीप उर्फ बाज को गिरफ्तार किया।

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