20 जनवरी को विधानसभा का घेराव करने को कर्मचारियों ने भरी हुंकार

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27/12/25 UP:- राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के आंदोलन के तृतीय चरण में 26 दिसंबर को वाराणसी मंडल के सम्मेलन एवं प्रेस वार्ता के आयोजन के साथ ही राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के आंदोलन का तीसरा चरण पूरा हो गया।संयुक्त परिषद से संबद्ध संगठनों के पदाधिकारी एवं सदस्यों ने सभी सम्मेलनों में बढ़ चढ़ कर प्रतिभाग किया।

संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने अवगत कराया कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं की लगातार अनदेखी कर रही है। आंदोलन का तीसरा चरण पूरा हो जाने के बाद भी मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव कार्मिक एवं विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी , कर्मचारियों की समस्याओं पर सकारात्मक निर्णय लेने के लिए वार्ता तक नहीं कर रहे हैं।

संयुक्त परिषद ने अगस्त में प्रदेश के मुख्य सचिव को कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत कराते हुए 3 सितंबर तक वार्ता के माध्यम से समस्याओं का निराकरण करने की मांग किया था, परंतु शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारी कर्मचारियों की मांगों पर लगातार मौन साधे हुए हैं। कर्मचारी संगठन एवं शासन के बीच संवाद हीनता आंदोलन का कारण है। यद्यपि सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारी निगम का गठन तो कर दिया, लेकिन आउटसोर्स कर्मचारियों को न्यूनतम मानदेय का लाभ अभी तक नहीं मिल रहा है।

सभी विभागों में लाखों पद रिक्त पड़े हुए हैं, परंतु उन पर नियुक्तियां नहीं हो रही हैं। सरकार ठेकेदारी प्रथा एवं संविदा कर्मचारियों के भरोसे पूरा सिस्टम चलाने का प्रयास कर रही है। संविदा कर्मियों एवं ठेकेदारी प्रथा के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों का शोषण चरम पर है। संविदा कर्मियों को मनमाने तरीके से बाहर किया जा रहा है।

नगरीय परिवहन सेवाओं में कार्यरत हजारों कर्मचारियों से सरकार रोजगार छीन चुकी है ,जबकि सबका साथ सबका विकास का नारा देने वाली सरकार ने इस संदर्भ में परिषद द्वारा भेजे गए दर्जनों पत्रों का संज्ञान तक नहीं लिया है ।
समाज कल्याण एवं जनजाति विकास विभाग में विगत दो वर्षों में दो दर्जन से अधिक संविदा शिक्षक नौकरी से हटाए जा चुके हैं। यही स्थिति अन्य विभागों की भी है। कर्मचारियों की वेतन विसंगति पर मुख्य सचिव समिति निर्णय नहीं कर रही है।

केंद्र एवं राज्य के अनुबंध के आधार पर कार्यरत संविदा कर्मियों, के अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मियों के मानदेय में विगत कई वर्षों से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। आशा बहुओं का शोषण हो रहा है। सरकार उनके लिए न्यूनतम मानदेय का निर्धारण नहीं कर रही है। काम के घंटे भी निश्चित नहीं है। केंद्रीय विक्री कर एवं राज्य विक्री कर के कर्मचारियों में विभेद किया जा रहा है ।

पंचायती राज विभाग में कार्यरत सफाई कर्मचारियों की सेवा नियमावली बनाई जाने, 2001 के बाद संविदा, वर्क चार्ज एवं दैनिक वेतन पर कार्यरत कर्मचारी- शिक्षकों का विनियमितीकरण किए जाने, सरकारी प्रतिष्ठानों का निजीकरण रोके जाने , सहित संयुक्त परिषद की 5 सूत्रीय मांगों पर मुख्यमंत्री जी का ध्यान आकर्षण करने के लिए संयुक्त परिषद 3 सितंबर से विभिन्न चरणों में आंदोलन कर रही है, लेकिन शासन के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता के कारण कर्मचारियों की समस्याओं का हल नहीं निकल रहा है, जिसके चलते आंदोलन तीसरे चरण में पहुंच गया है।
संयुक्त परिषद शासन एवं कर्मचारियों के बीच सद्भाव का वातावरण बनाकर कार्य करना चाहती है, परंतु प्रशासनिक अधिकारियों के साथ संवाद हीनता के कारण 20 जनवरी 2026 को विधान सभा पर प्रदर्शन का कार्यक्रम अपरिहार्य हो गया है। संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने मुख्यमंत्री जी से हस्तक्षेप का अनुरोध किया है।

संयुक्त परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष निरंजन कुमार श्रीवास्तव ने सरकार पर कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाल किए जाने, खाद्य रसद विभाग में कार्यरत संयुक्त परिषद के नियम विरुद्ध किए गए स्थानांतरण निरस्त किए जाने, धान खरीद में आयरिश स्कैनिंग की अनिवार्यता को समाप्त किए जाने का मुद्दा भी उठाया।

उन्होंने आउटसोर्स कर्मचारियों का न्यूनतम मानदेय शीघ्र लागू किए जाने, आशा बहुओं को 18000 न्यूनतम मानदेय दिए जाने, मानदेय पर कार्यरत रसोईया, चौकीदार को भी समान मानदेय की सुविधा दिए जाने की मांग किया तथा नगरीय परिवहन सेवाओं में कार्यरत संविदा चालकों परिचालकों को यथावत सेवा में बनाए रखे जाने की मांग दोहराई तथा 20 जनवरी को विधान सभा के घेराव की जोरदार तैयारी पूर्ण होने का ऐलान किया।

संयुक्त परिषद की महामंत्री अरुणा शुक्ला ने सम्मेलनों में कर्मचारियों को संबोधित करते हुए अवगत कराया कि महिला सशक्तिकरण का नारा देने वाली सरकार में महिलाओं का शोषण सबसे अधिक है।

संयुक्त परिषद एवं अन्य संगठनों में कार्यरत महिला पदाधिकारियों को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। महिला पदाधिकारियों को शासन द्वारा दी गई विशेष अवकाश एवं अन्य सुविधाएं भी समाज कल्याण, महिला कल्याण विभाग के अधिकारी नहीं दे रहे हैं।

कर्मचारी संगठनों से संबंधित सुविधा दिए जाने के शासनादेशों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन हो रहा है। अरुणा शुक्ला ने संविदा कर्मियों के लिए वार्षिक वेतन, वृद्धि दिए जाने, चिकित्सा सुविधा दिए जाने एवं बोनस दिए जाने की मांग किया है।

उन्होंने आगे कहा है कि सरकार संविदा कर्मियों को उनके पद के अनुरूप न्यूनतम वेतन एवं महंगाई भत्ता दे रही है तो फिर बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय भार के विनियमितिकरण में क्या परेशानी है? आशा हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन की अध्यक्ष कुसुम लता के नेतृत्व में सैकड़ो की संख्या में आशा बहुएं सभी सम्मेलनों में उपस्थित थी।

सम्मेलनों में चिकित्सा स्वास्थ्य, खाद्य रसद, नगरीय परिवहन,कृषि, बिक्रीकर, सिंचाई,समाज कल्याण, शिक्षा, उच्च शिक्षा, लोक निर्माण , माध्यमिक शिक्षा ,जनजाति विकास विभाग, परिवहन निगम ,पशुपालन, वन एवं पर्यावरण, चिकित्सा शिक्षा विभाग, उद्यान, सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारियों एवं पदाधिकारियों ने शिरकत किया।

कर्मचारियों के जोश को देखते हुए 20 जनवरी को विधानसभा के घेराव कार्यक्रम ऐतिहासिक होगा ।

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