उत्तर प्रदेश के नोएडा में STF के हत्थे चढ़ा फर्जी RAW ऑफिसर, आरोपी के पास से मिले ID समेत कई दस्तावेज़

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19/11/25 :- नोएडा में पिछले कई महीनों से एक अफसर लोगों की नजरों में बार-बार आ रहा था. कभी खुद को RAW का ऑपरेशन ऑफिसर बताता, कभी किसी गोपनीय मिशन पर भेजा गया सरकारी अधिकारी. उसके पास एक पाउच होता था, जिसमें अलग-अलग नामों के पहचान पत्र, कई बैंकों की चेकबुकें और सरकारी पहचान जैसा दिखने वाला एक कार्ड होता. लोग अक्सर उसकी बातों पर यकीन भी कर लेते थे, क्योंकि उसके पास हर सवाल का तैयार जवाब और हर मौके के लिए एक नई पहचान मौजूद थी।
लेकिन नोएडा के सूरजपुर में यूपी STF की नोएडा यूनिट ने जब उसे रोका, तो वह पूरा ‘खुफिया अफसर’ महज़ सेकेंडों में ढह गया. सामने आया वह न कोई अधिकारी, न कोई सरकारी कर्मचारी था, बल्कि बिहार के वैशाली जिले का रहने वाला सुनीत कुमार था, जिसने फर्जी पहचान की इतनी परतें चढ़ा रखी थीं कि पहली नजर में किसी प्रोफेशनल ठग का अंदाजा लगाना भी मुश्किल था।
सुनीत के बैग से जिस RAW ऑफिसर ID की बरामदगी हुई, उसमें उसकी फोटो लगी थी और कार्ड पर सुरक्षा निशान जैसी प्रिंटिंग की गई थी. बड़े अक्षरों में उसका नाम भी लिखा था. लेकिन यह पूरी तरह से फर्जी दस्तावेज था. जिसे एसटीएफ की टीम देखते ही समझ गई. एसटीएफ के अधिकारियों के अनुसार, सुनीत इस कार्ड को दिखाकर न केवल लोगों को प्रभावित करता था, बल्कि खुद को संवेदनशील मिशन पर तैनात बताकर कई बार पुलिस चेकिंग से भी बच चुका था. जांच में यह भी पता चला कि सुनीत अक्सर अलग-अलग नंबरों से कॉल करता था और अपने परिचितों को बताता था कि वह इंटेलिजेंस ऑपरेशन में बिज़ी है।

जांच में STF अधिकारी भी तब हैरान रह गए, जब उसके बैग से एक-एक कर दस्तावेज निकलने लगे. उसके पास से 2 फर्जी सरकारी ID कार्ड (RAW ऑफिसर सहित), 20 अलग-अलग बैंकों की चेकबुकें, 8 डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 5 पैन कार्ड, 2 आधार कार्ड, 3 वोटर ID कार्ड, 17 अलग-अलग नामों के एग्रीमेंट/किरायानामा और कई अन्य संदिग्ध दस्तावेज भी मिले हैं. प्रत्येक पहचान पर सुनीत की फोटो तो होती थी, लेकिन नाम हर बार अलग. कभी वह राहुल, कभी अमित, कभी सुदीप शर्मा बन जाता था. कई एग्रीमेंट ऐसे मिले हैं जिनमें वह खुद को सरकारी प्रोजेक्ट का अधिकारी बताकर किराए पर मकान लेता था।



20 अलग-अलग बैंकों की चेकबुकें और कई कार्ड मिलने से पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सुनीत इन खातों का इस्तेमाल किस लिए करता था. क्या वह फर्जी KYC बनाकर बैंकिंग फ्रॉड करता था या क्या इन खातों में किसी प्रकार के फंड ट्रांसफर का खेल चल रहा था या फिर पहचान छिपाने के लिए ये खाते खोले गए थे? फिलहाल बैंक खातों की जांच में लेनदेन का पैटर्न खंगाला जा रहा है।

कैसे चलता था सुनीत का ‘खुफिया अफसर’ वाला खेल
आरोपी उन इलाकों को चुनता था जहां उसकी पहचान के जांच की संभावना कम हो. वह अक्सर किराए के घर बदलता था, कभी 2 महीने तो कभी 6 महीने. जिन लोगों से मिलता, उन्हें बताता कि वह RAW में “विशेष ड्यूटी” पर है, इसलिए किसी से ज्यादा घुलता-मिलता नहीं. फर्जी कार्ड दिखाकर वह कई बार स्थानीय प्रशासनिक दफ्तरों में भी प्रवेश कर चुका है. STF को शक है कि उसने इस पहचान का उपयोग कई छोटे-मोटे आर्थिक लाभ लेने में भी किया होगा।

सूरजपुर इलाके में पिछले कुछ दिनों से एक अफसर के घूमने की सूचना लगातार मिल रही थी. वह खुद को RAW अधिकारी बताता था, लेकिन उसके व्यवहार और गतिविधियों पर कई लोगों को शक हो रहा था. सूचना के आधार पर STF टीम ने उसकी मूवमेंट को ट्रैक किया. सोमवार शाम जैसे ही वह एक दुकान के बाहर खड़ा दिखा, टीम ने उसे रोककर पूछताछ शुरू की. पहचान पत्र की पहली नजर में ही टीम को गड़बड़ी महसूस हुई।

पूछताछ में बड़े खुलासों की उम्मीद
फिलहाल STF आरोपी से यह जानने का प्रयास कर रही है कि उसके पास इतने फर्जी दस्तावेज़ कहां से आए. क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह है. क्या वह आर्थिक या साइबर फ्रॉड में पहले भी शामिल रहा है. क्या उसने RAW का नाम कहीं दबाव या धमकी जैसी गतिविधियों में इस्तेमाल किया. जांच टीम ने कहा है कि इस तरह की पहचान बदलने की क्षमता वाला व्यक्ति अकेला काम नहीं करता. इसके तार अन्य ठगों तक भी पहुंच सकते हैं. एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ संगीन धाराओं में केस दर्ज किया गया है. उसके डिजिटल डिवाइस, मोबाइल फोन और बैंक खातों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है.STF का कहना है कि अभी यह शुरुआती गिरफ़्तारी है, मुख्य खुलासे आगे होने की संभावना है।

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