30/11/25 Delhi:- सुप्रीम कोर्ट ने अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करते हुए केस लिस्टिंग प्रणाली में बड़े सुधार की घोषणा की है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने चार नए परिपत्र जारी किए हैं, जिनके अनुसार 1 दिसंबर 2025 से नई याचिकाएं स्वतः सूचीबद्ध होंगी। इससे वकीलों और पक्षकारों को कोर्ट में लगातार मेंशनिंग कराने की आवश्यकता लगभग समाप्त हो जाएगी।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों, जैसे तत्काल अंतरिम राहत की मांग वाली याचिकाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसी याचिकाओं में त्रुटियां दूर होते ही और सत्यापन पूर्ण होते ही उन्हें दो कार्य-दिवसों के भीतर सूचीबद्ध किया जाएगा।
जमानत याचिकाओं के शीघ्र निपटान के लिए याचिकाकर्ता को केंद्र/राज्य/संघ शासित प्रदेश के संबंधित नोडल अधिकारी या स्टैंडिंग काउंसिल को अग्रिम प्रति उपलब्ध करानी होगी। इससे सुनवाई में तेजी आएगी।

अत्यावश्यक मामलों जैसे अग्रिम जमानत, मृत्यु-दंड, हैबियस कॉर्पस, बेदखली/उजाड़ने से जुड़े मामलों के लिए सुबह 10:00 बजे से 10:30 बजे तक विशेष समय-खिड़की में मेंशनिंग की अनुमति होगी।
एक बड़ा बदलाव यह है कि अब सीनियर काउंसिल को मौखिक मेंशनिंग की अनुमति नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट जूनियर वकीलों को मेंशनिंग के लिए प्रोत्साहित करेगा। पुराने लंबित मामलों में स्थगन-पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे, जिससे लंबित सुनवाई तेज हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था से कोर्ट में रोज़ाना होने वाली भीड़भाड़ और मेंशनिंग की अनिश्चितता में कमी आएगी। आम litigants को भी राहत मिलेगी, जो अपने मामलों की लिस्टिंग के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा करते थे।
नई प्रणाली 1 दिसंबर से लागू होगी और इसे सुप्रीम कोर्ट के हालिया इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधारों में से एक माना जा रहा है।