सेना से रिटायर शख्स कैसे बना “साइको किलर”गुरप्रीत सिंह’ की दर्दनाक दास्ताँ का खौफनाक अंत

94

13/05/26 UP:- उत्तर प्रदेश के चंदौली, वाराणसी और आसपास के इलाकों में पिछले 2 दिनों तक ऐसा खौफ पसरा रहा, जिसने पुलिस महकमे से लेकर आम यात्रियों तक की नींद उड़ा दी।

*चलती ट्रेनों में कनपटी पर गोली मारकर हत्या…

*अस्पताल में घुसकर बेड पर लेटी महिला को मौत के घाट उतारना…

*और फिर भीड़ के बीच पकड़े जाने के बाद बेखौफ अंदाज में कहना— “मैं मन का राजा हूं… जो मन करता है, करता हूं…”।

कहानी गुरप्रीत सिंह की

यह कहानी है पंजाब के तरनतारन निवासी 45 वर्षीय गुरप्रीत सिंह की, जिसे पुलिस शुरुआती जांच में “साइको किलर” मान रही है। सेना से रिटायर हो चुका यह शख्स महज 2 दिनों के भीतर तीन लोगों की जान लेकर पूरे सिस्टम के लिए चुनौती बन गया। लेकिन सोमवार देर रात करीब 12 बजे चंदौली पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में उसका अंत हो गया।

पुलिस के मुताबिक

आरोपी को क्राइम सीन रीक्रिएट कराने ले जाया गया था। इसी दौरान उसने पुलिसकर्मी की पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश की और फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसके सिर और सीने में गोली लगी। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।

पूरा मामला रविवार सुबह शुरू हुआ। पहली नजर में यह एक सामान्य हत्या लगी, लेकिन कुछ घंटों बाद जब दूसरी वारदात हुई, तो पुलिस को समझ आने लगा कि कोई बेहद खतरनाक अपराधी खुलेआम घूम रहा है। तीसरी हत्या ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी।

तीनों हत्याओं में एक चीज बिल्कुल समान थी:— सीधे कनपटी पर गोली।

यही पैटर्न पुलिस के लिए सबसे बड़ा संकेत बना। जांच एजेंसियों को यकीन हो गया कि तीनों वारदातों के पीछे एक ही हत्यारा है।

पहली वारदात

रविवार सुबह करीब 7 बजे गुरप्रीत सिंह पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से डीडीयू- ताड़ीघाट पैसेंजर ट्रेन में सवार हुआ। ट्रेन चंदौली के कचमन स्टेशन के पास पहुंची थी। उसी कोच में गाजीपुर के जमानिया निवासी 34 वर्षीय मंगरू भी सफर कर रहा था।

मंगरू 15 दिन पहले काम की तलाश में कर्नाटक गया था। वहां मछली पकड़ने का काम कर रहा था, लेकिन काम पसंद नहीं आया और वह वापस घर लौट रहा था।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रेन में किसी बात को लेकर मंगरू और गुरप्रीत के बीच कहासुनी हुई। अचानक गुरप्रीत ने तमंचा निकाला और मंगरू की कनपटी पर गोली मार दी।

गोली लगते ही कोच में चीख-पुकार मच गई। लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले आरोपी ने मंगरू के शव को ट्रेन से नीचे फेंक दिया। ट्रेन की रफ्तार धीमी होते ही वह खुद भी कूदकर फरार हो गया।

सुबह-सुबह हुई इस सनसनीखेज हत्या ने रेलवे पुलिस को हिला दिया, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सिर्फ शुरुआत है।

दूसरी हत्या:- जम्मूतवी एक्सप्रेस में फिर वही तरीका
पहली हत्या के बाद गुरप्रीत करीब 9 किलोमीटर दूर व्यासनगर पहुंचा। वहां से वह जम्मूतवी एक्सप्रेस ट्रेन में सवार हो गया।

रविवार देर रात करीब 2 बजे ट्रेन वाराणसी के पास पहुंची थी। गया जिले के रहने वाले 42 वर्षीय दिनेश साहू अपनी पत्नी के साथ कोच S-2 में यात्रा कर रहे थे। वह नैमिषारण्य धाम जा रहे थे।

दिनेश बाथरूम गए थे। जैसे ही वह बाहर निकले, गुरप्रीत ने बेहद करीब से उनकी कनपटी पर गोली मार दी। गोली की आवाज सुनकर ट्रेन में अफरा-तफरी मच गई। पत्नी दौड़कर पहुंची तो पति खून से लथपथ पड़े थे। इसी दौरान ट्रेन की रफ्तार धीमी हुई और आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर नीचे कूद गया।

जब पुलिस ने दोनों घटनाओं की जांच शुरू की, तो एक बात ने सबको चौंका दिया—
दोनों हत्याओं का तरीका बिल्कुल एक जैसा था।

अब पुलिस को शक नहीं, बल्कि यकीन हो गया था कि कोई सीरियल किलर खुलेआम घूम रहा है।

तीसरी हत्या:-

अस्पताल में घुसा और बेड पर लेटी महिला को मारी गोली
दो ट्रेन हत्याओं के बाद पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी थी, लेकिन तब तक वह तीसरी वारदात की तैयारी कर चुका था।

सोमवार सुबह करीब साढ़े 8 बजे चंदौली के अलीनगर थाना क्षेत्र स्थित जीवक अस्पताल में एक व्यक्ति इलाज कराने के बहाने पहुंचा। उसने अपना नाम “वीरेंद्र” और पता “अंबाला” लिखवाया।

वार्ड बॉय ने उसका ब्लड प्रेशर और पल्स चेक किया। बीपी सामान्य था, लेकिन पल्स 109 थी, जो सामान्य से ज्यादा मानी जाती है।

कुछ देर बाद वह सीधे उस वार्ड में पहुंचा, जहां बिहार के भभुआ निवासी लक्ष्मीना देवी भर्ती थीं। महिला का पैर टूटा था और वह पिछले एक महीने से अस्पताल में भर्ती थीं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आरोपी महिला के बेड के पास पहुंचा… पिस्टल निकाली… और कनपटी पर सटाकर गोली मार दी।

अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। लोग चीखने लगे। मरीज और स्टाफ इधर-उधर भागने लगे। लेकिन असली ड्रामा इसके बाद शुरू हुआ।

ऑटो चालक ने दिखाई बहादुरी
महिला की हत्या के बाद गुरप्रीत फायरिंग करते हुए अस्पताल से बाहर भागा। उसी समय बाहर मौजूद ऑटो चालक विनोद दुबे ने लोगों की चीखें सुनीं।

विनोद ने बिना अपनी जान की परवाह किए आरोपी का पीछा किया। आरोपी ने उस पर पिस्टल तान दी, लेकिन विनोद पीछे नहीं हटे। उन्होंने आरोपी का हाथ मरोड़ दिया, जिससे पिस्टल नीचे गिर गई।

इसके बाद भीड़ जमा हो गई। लोगों ने आरोपी को घेर लिया। उसके दोनों हाथ गमछे से बांध दिए गए। कई लोगों ने गुस्से में उसे ईंट-पत्थरों से पीटा। अगर पुलिस समय पर नहीं पहुंचती, तो भीड़ वहीं उसका काम- तमाम कर देती।

पुलिस किसी तरह आरोपी को भीड़ से बचाकर थाने ले गई।

पुलिस पूछताछ में बोला – “एक नहीं, दो-तीन को मारकर आया हूं”
भीड़ की पिटाई से गुरप्रीत घायल हो चुका था। पुलिस ने पहले उसका इलाज कराया। जब वह बोलने की हालत में आया, तो अधिकारियों ने उससे हत्या की वजह पूछी।

उसका जवाब सुनकर पुलिस अधिकारी भी सन्न रह गए।

पहले तो पुलिस को लगा कि वह बड़बड़ा रहा है, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर उसने तीनों हत्याएं कबूल कर लीं।

सेना से रिटायर, फिर जिंदगी बिखरती चली गई
पुलिस जांच में सामने आया कि गुरप्रीत सिंह पंजाब के तरनतारन जिले के तरहतूचक गांव का रहने वाला था। वह करीब छह साल पहले सेना से रिटायर हुआ था।
परिवार में पिता, दो भाई, पत्नी और दो बच्चे हैं। लेकिन रिटायरमेंट के बाद उसकी जिंदगी पटरी से उतरने लगी।

बताया जा रहा है कि वह शराब का आदी हो चुका था। मानसिक रूप से अस्थिर रहने लगा था। छोटी-छोटी बातों पर हिंसक हो जाता था।

हाल ही में वह बिहार के आरा में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने गया था। वहां भी शराब पीकर हंगामा करने लगा। आखिरकार नौकरी से निकाल दिया गया।

इसके बाद वह लगातार ट्रेनों में घूमता रहा। पुलिस के मुताबिक, 9 मई से वह प्रयागराज, चंदौली और आसपास के इलाकों में अलग-अलग ट्रेनों से सफर कर रहा था।

डॉक्टरों ने बताया :– एंग्जायटी डिसऑर्डर के संकेत
अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर एसके चतुर्वेदी के मुताबिक, आरोपी का बीपी सामान्य था, लेकिन पल्स 100 से ऊपर थी।

डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी स्थिति एंग्जायटी डिसऑर्डर की ओर इशारा कर सकती है, जिसमें व्यक्ति तनाव और बेचैनी की हालत में रहता है।

हालांकि, पुलिस अभी मानसिक बीमारी और शराब की लत—दोनों एंगल पर जांच कर रही थी।

पुलिस की बड़ी चुनौती बन चुका था गुरप्रीत
लगातार तीन हत्याओं ने पुलिस पर भारी दबाव बना दिया था। दो मर्डर चलती ट्रेनों में और तीसरा अस्पताल के अंदर—इससे साफ हो गया था कि आरोपी बेहद खतरनाक और बेखौफ है।

एडीजी पीयूष मोर्डिया समेत कई बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे। रेलवे पुलिस, लोकल पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें एक साथ लगी थीं। लेकिन अस्पताल में पकड़े जाने के बाद मामला तेजी से खुल गया।

सोमवार देर रात पुलिस आरोपी को लेकर दरियापुर रेलवे लाइन के पास पहुंची। अधिकारियों के मुताबिक, वहां क्राइम सीन रीक्रिएट कराया जा रहा था।

इसी दौरान गुरप्रीत ने अचानक एक पुलिस अधिकारी की पिस्टल छीन ली और फायरिंग करते हुए भागने लगा।

पुलिस ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं रुका। इसके बाद जवाबी फायरिंग हुई।

गुरप्रीत के सिर और सीने में गोली लगी। उसे गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।

2 दिनों तक दहशत
रविवार सुबह से सोमवार रात तक चंदौली, वाराणसी और आसपास के इलाकों में खौफ का माहौल बना रहा।

रेल यात्रियों में डर था कि कहीं कोई अजनबी अचानक हमला न कर दे। अस्पतालों में सुरक्षा बढ़ा दी गई। पुलिस लगातार गश्त करती रही।

सोशल मीडिया पर “साइको किलर” शब्द तेजी से ट्रेंड करने लगा।

लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल
आखिर कोई इंसान बिना किसी निजी दुश्मनी के इस तरह लोगों को क्यों मारता रहा?

तीन परिवार… जो कभी नहीं भूल पाएंगे यह खौफ
इस खूनी खेल में तीन परिवार हमेशा के लिए बिखर गए।

मंगरू– जो काम की तलाश में घर से निकला था
दिनेश साहू– जो धार्मिक यात्रा पर जा रहे थे
लक्ष्मीना देवी– जो अस्पताल में इलाज करा रही थीं
इन तीनों को शायद अंदाजा भी नहीं था कि उनका सामना एक ऐसे शख्स से होने वाला है, जो मौत को खेल समझ चुका था।

Leave A Reply

Your email address will not be published.