28/07/26 लखनऊ:- उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा अपने स्वयं के आदेश दिनांक 15.05.2017 का उल्लंघन कर लगभग 25000 आउटसोर्स कर्मचारियों को कार्य से हटाने, हटाये गये कर्मचारियों को कार्य पर वापस न लेने, ऊर्जा मंत्री के निर्देश पर पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा दिनांक 18.09.2025 को किये गये आदेश के अनुसार कार्य के अनुरूप अनुबन्ध न करने, वेतन रूपया 18000/- निर्धारित न करने, घायल कर्मचारियों का कैशलेस उपचार न कराने, घायल कर्मचारियों द्वारा उपचार में व्यय की गयी धनराशि को संविदाकारों के बिल से काटकर भुगतान न करने एवं मार्च 2023 में हटाये गये कर्मचारियों को कार्य पर वापस न लेने, 14 माह बाद भी मानक समिति की रिपोर्ट उपलबध न कराने, दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश न लगाने, उ०प्र० पावर कार्पोरेशन एवं अन्य ऊर्जा निगमों में कार्य कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों को नवगठित आउटसोर्स सेवा निगम में शामिल करने का विरोध करने, विद्युत उपकेन्द्रों पर ड्यूटी चार्ट चस्पा न कराने, श्रमायुक्त द्वारा निर्धारित अवकाश न देने, उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने, 55 वर्ष का हवाला देकर हटाये गये कर्मचारियों को कार्य पर वापस न लेने, ई०पी०एफ० घोटाले की जांच न कराने, ई०पी०एफ० घोटाले की जांच में दोषी पाये गये।
ठेकेदारों के खिलाफ कार्यवाही न करने, मीटर रीडरों को अन्य आउटसोर्स कर्मचारियों की भांति वेतन / ई०पी०एफ० व ई०एस०आई० का लाभ न देने, कर्मचारियों के बकाये वेतन का भुगतान न करने आदि के कारण संगठन द्वारा कल शक्ति भवन लखनऊ पर सुबह 10 बजे से धरना प्रदर्शन शुरू किया गया।
दोपहर 2 बजे संगठन पदाधिकारियों व प्रबन्ध निदेशक उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन शक्ति भवन लखनऊ के बीच बैठक वार्ता हुई जो असफल रही जिसके बाद संगठन द्वारा धरना प्रदर्शन को जारी रखने का निर्णय लिया गया।